Nitish Kumar calls JDU Meeting: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाई है. ये बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब कुछ दिन पहले ही गृह मंत्री शाह ने यूसीसी को लेकर बयान दिया था.

Nitish Kumar calls JDU Meeting: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जेडीयू के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाई है. ये बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब कुछ दिन पहले ही गृह मंत्री शाह ने यूसीसी को लेकर बयान दिया था.

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नीतीश कुमार, जेडीयू अध्यक्ष

Nitish Kumar calls JDU Meeting: गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर किए गए एलान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने पार्टी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई है. यह बैठक 18 सितंबर को पटना में  जेडीयू दफ्तर में होगी. खबरों के मुताबिक, इस बैठक में यूसीसी (UCC) पर चर्चा होने की उम्मीद है. इसके साथ ही बैठक के एजेंडे में फरक्का जल संधि भी शामिल हो सकती है.

बता दें कि जेडीयू की ये बैठक तब बुलाई गई है जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले BJP के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा. इस घोषणा ने नई राजनीतिक बहस शुरू कर दी है. खासकर जेडीयू जैसे एनडीए के सहयोगी इस बयान के बाद सकते में आ गए हैं.

जानें क्यों बुलाई नीतीश कुमार ने जेडीयू की बैठक?

दरअसल, यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है कि क्योंकि जेडीयू ने अब तक यूसीसी पर सतर्क रुख अपनाया है. बिहार के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि पार्टी अपना रुख तय करने से पहले प्रस्तावित कानून की जांच करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी को अभी यूसीसी कानून की बारीकियों के बारे में जानकारी नहीं है और वह अपनी कोई भी चिंता केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंचाएगी.

विजय चौधरी ने आगे कहा कि इस मामले में "जल्दबाजी करने की कोई वजह नहीं है." उन्होंने कहा, "अगर हमें लगता है कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, तो हम बिना किसी वजह के इसका विरोध क्यों करेंगे? और अगर चिंता की कोई बात होगी, तो उसे केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंचाया जाएगा."

वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी संकेत दिया है कि पार्टी UCC के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के साथ चर्चा करेगी. बता दें कि जेडीयू के पास लोकसभा में 12 सांसद हैं, ऐसे में वह बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में एक अहम सहयोगी पार्टी है और बिहार में बीजेपी के साथ सत्ता में साझेदार भी है.

यूसीसी पर क्या बोले थे गृह मंत्री अमित शाह?

बता दें कि ताजा राजनीतिक बहस तब शुरू हुई जब गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा कि उन्हें भरोसा है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए-शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर  दिया जाएगा. प्रस्तावित UCC का मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से परे हटकर पर्सनल लॉ (व्यक्तिगत कानूनों) का एक साझा ढांचा बनाना है. शाह के इस बयान पर देश भर की राजनीतिक पार्टियों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिनमें बिहार में जेडीयू के नेता भी शामिल हैं.

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ओवैसी ने की यूसीसी के प्रस्ताव की आलोचना

वहीं AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी प्रस्तावित UCC की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया कि BJP और RSS गैर-हिंदुओं पर हिंदू पर्सनल लॉ थोपने की कोशिश कर रहे हैं. ओवैसी ने यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आदिवासी समुदायों को बाहर रखने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का मकसद मुसलमानों को निशाना बनाना है. उन्होंने तर्क दिया कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ी संवैधानिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. एआईएमआईएम प्रमुख ने जेडीयू समेत एनडीए  के सहयोगियों से भी अपील की कि अगर वे बीजेपी के रुख से सहमत नहीं हैं, तो यूसीसी का विरोध करें.

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