आगरा में रविवार (20 सितंबर) को UGC के विरोध में सवर्ण समाज के करीब 1500 युवक 200 ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतर आए। यमुना एक्सप्रेस-वे जाम कर दिया। पुलिस को बुलडोजर, जेसीबी और क्रेन लगाकर उन्हें रोकना पड़ा।

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UGC को लेकर पिछले 21 दिनों में यह तीसरा आंदोलन था। 1 सितंबर को क्षत्रिय सभा ने हाईवे जाम किया था। हंगामे और प्रदर्शन के बाद दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया। 18 सितंबर को 5 घंटे चले हंगामे के बाद प्रदर्शनकारियों की डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से बात कराई गई थी। मांगें केंद्र सरकार तक पहुंचाने के आश्वासन के बाद ही आंदोलनकारी शांत हुए थे।

आज यूपी एक्सप्लेनर में पढ़िए दलित बहुल आगरा में सवर्ण आंदोलन क्यों हो रहा? क्या ये फिर से UGC आंदोलन शुरू होने की आहट है?

सवाल-1: UGC आंदोलन अचानक फिर से शुरू होने की वजह क्या है?

जवाब: UGC रेग्युलेशंस-2026 पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद जनवरी में UGC विवाद ऊपरी तौर पर भले शांत हो गया हो, लेकिन सवर्ण समाज के संगठनों के भीतर यह मुद्दा लगातार चल रहा था।

  • 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव होने हैं। संगठनों को लगा कि चुनावी माहौल ही वह समय है, जब सरकार पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया जा सकता है। सवर्ण संगठनों को लगा कि अगर अभी दबाव नहीं बनाया गया, तो सरकार नया संशोधित मसौदा ले आएगी।
  • चूंकि केंद्र सरकार ने अभी UGC नियम वापस (रोलबैक) नहीं लिए हैं। इसी वजह से विभिन्न सवर्ण संगठन अपना नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं। खासकर पश्चिमी यूपी में सिस्टम सुधार संगठन, यूजीसी मुक्ति मोर्चा और स्थानीय क्षत्रिय/ब्राह्मण महासभाओं की गांवों में बैठकें हो रही हैं।
  • आगरा के एत्मादपुर-खंदौली इलाके की 'बाइसी' (22 क्षत्रिय बहुल गांव) बेल्ट में युवाओं को बताया जा रहा है कि अगर UGC नियम लागू हुए, तो शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों पर झूठी शिकायतें दर्ज होने का खतरा रहेगा।
  • 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद मामले में नया मोड़ आया। यही आंदोलन शुरू होने की मुख्य वजह बना। दरअसल, सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार नियमों पर दोबारा विचार कर रही है।
  • इससे संदेश गया कि केंद्र सरकार UGC रेग्युलेशंस-2026 को पूरी तरह वापस लेने के बजाय संशोधन करके लागू करने की कोशिश कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को 4 हफ्ते में अपना विस्तृत हलफनामा दायर करने के भी निर्देश दिए थे। ऐसे में सवर्ण संगठनों को लगा कि अगर अभी दबाव नहीं बनाया गया, तो सरकार नया संशोधित मसौदा ले आएगी।
आगरा कलेक्ट्रेट जा रहे प्रदर्शनकारियों को JCB और क्रेन लगाकर रोकना पड़ा। इससे नाराज प्रदर्शनकारी यमुना एक्सप्रेस-वे पर चढ़ गए।

आगरा कलेक्ट्रेट जा रहे प्रदर्शनकारियों को JCB और क्रेन लगाकर रोकना पड़ा। इससे नाराज प्रदर्शनकारी यमुना एक्सप्रेस-वे पर चढ़ गए।

सवाल-2: दलित बहुल जिले आगरा में ही सवर्ण आंदोलन क्यों शुरू हुआ?

जवाब: दलित बहुल जिले में UGC विरोधी सवर्ण आंदोलन भड़कना पहली नजर में विरोधाभासी लग सकता है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि आगरा शहर भले ही जाटव/दलित राजनीति का गढ़ हो, लेकिन जिले के ग्रामीण और बाहरी इलाकों का सामाजिक ढांचा काफी अलग है।

  • 2011 की जनगणना के अनुसार, आगरा जिले में SC आबादी करीब 22.43% है। इसमें 3.95 लाख (करीब 13%) वोटर के साथ जाटव सबसे बड़ा वर्ग है। वहीं, अलग-अलग जातियों के लिहाज से ब्राह्मण सबसे ज्यादा हैं। कुल वोटर्स में इनकी हिस्सेदारी करीब 14.13% यानी 4.16 लाख के आस-पास है।
  • इसके अलावा करीब 12.57% यानी करीब 3.70 लाख क्षत्रिय हैं। एत्मादपुर और ग्रामीण इलाकों में इनकी अच्छी पकड़ है। साथ ही वैश्य समाज भी 5% के करीब है। इस तरह सवर्णों की कुल आबादी 32% तक पहुंच जाती है।
  • जिले की एत्मादपुर तहसील और खंदौली इलाके में सवर्णों खासकर क्षत्रिय और ब्राह्मण समाज की घनी और संगठित आबादी है। एत्मादपुर में क्षत्रिय समाज के 22 गांव एक-दूसरे से सटे हुए हैं, जिसे 'बाइसी' कहा जाता है। आंदोलन इसी बेल्ट में हो रहा है।
  • यह इलाका यमुना एक्सप्रेस-वे और आगरा-कानपुर नेशनल हाईवे से सटा है। 20 सितंबर को जब पुलिस ने कलेक्ट्रेट जा रहे प्रदर्शनकारियों को रोका, तो उन्होंने तुरंत यमुना एक्सप्रेस-वे जाम कर दिया। इससे मामला नेशनल मीडिया और सरकार की सुर्खियों में आ गया।

सवाल-3: UGC आंदोलन का यूपी चुनाव पर क्या असर हो सकता है?

जवाब: राजनीतिक विश्लेषक चुनाव पर इसके प्रभाव ऐसे समझ सकते हैं…

  • वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह बताते हैं- सवर्ण (विशेषकर ब्राह्मण और राजपूत) भाजपा का सबसे विश्वसनीय और मजबूत वोट बैंक माना जाता है। अगर आंदोलन लंबा खिंचता है, तो इस कैडर और वोटर वर्ग में उपेक्षा का अहसास गहरा सकता है।
  • दूसरी तरफ, कांग्रेस और सपा के लिए यह एक नाजुक मुद्दा है। वे सवर्णों की नाराजगी का फायदा उठाकर भाजपा पर हमला तो बोल रहे हैं। लेकिन, खुलकर सवर्णों के पक्ष में खड़े होने से हिचकिचा रहे हैं। उन्हें डर है कि उनका अपना 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) या दलित/OBC वोट बैंक नाराज न हो जाए।
  • यूपी में चुनाव सामाजिक समीकरणों और जातीय ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द सिमट जाते हैं। आने वाले समय में अगर मामला और बढ़ता है, तो 2027 का चुनाव विकास के मुद्दों के बजाय जातीय गोलबंदी हावी हो सकती है।
  • कुल मिलाकर UGC विवाद पर पूरे यूपी में असंतोष की लहर तो है। लेकिन, मुद्दे का राजनीतिक रूप लेना इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में क्या नया मसौदा पेश करती है? राजनीतिक दल इसे किस हद तक चुनावी मोड़ देते हैं?

सवाल-4: क्या पूरे यूपी में आंदोलन शुरू हो सकते हैं?

जवाब: राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से इस पूरे मामले को ऐसे समझ सकते हैं…

  • मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन यूपी के अन्य जिलों में भी UGC नियमों को लेकर दोबारा विरोध शुरू हो गया है। आगरा के अलावा लखनऊ, गाजीपुर , बरेली, बलरामपुर, नोएडा जिलों में करणी सेना, अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा, किसान यूनियनों और छात्र संगठनों ने जिलाधिकारी/एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर विरोध जता रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 24 दिन से धरना चल रहा है।
  • सुरेश बहादुर सिंह का मानना है कि आंदोलन पूरे यूपी में फैल सकते हैं या नहीं, यह अगले कुछ हफ्तों में केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर करता है। अगर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के अपने हलफनामे में साफ कर देती है कि नियमों में संशोधन कर सुरक्षात्मक उपाय जोड़ेगी, तो आंदोलन शांत हो जाएगा।
  • 2027 चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि उसका सबसे मजबूत कोर वोटबैंक लंबे समय तक सड़कों पर रहे। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के जरिए इसका रास्ता निकाले जाने की संभावना ज्यादा है।
  • इसका ताजा उदाहरण केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करणी सेना की 19 सितंबर को हुई बैठक है। करणी सेना ने 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर ‘UGC रोलबैक महापंचायत’ बुलाई थी। इससे एक दिन पहले हुई बैठक में सरकार ने उनकी मांग पर विचार करने के लिए 3 सप्ताह का समय मांगा। इसके बाद महापंचायत टाल दी गई। 3 हफ्ते बाद फिर से बैठक होनी है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के घर पर शनिवार (19 सितंबर) को क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत के साथ UGC रेग्युलेशन पर बातचीत हुई।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के घर पर शनिवार (19 सितंबर) को क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत के साथ UGC रेग्युलेशन पर बातचीत हुई।

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