जंतर-मंतर पर अब आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन, उमड़ी हजारों की भीड़, UGC के नए नियमों पर हल्ला बोल

जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन हो रहा है. इस बार बड़ी संख्या में गैर-आरक्षित वर्गों के प्रदर्शनकारी जुटे हैं. अगड़ी जातियों से आने वाले इन प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के इक्विटी नियमों का विरोध किया. साथ ही जाति-आधारित आरक्षण में सुधार की मांग की. ‘रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन’ के बैनर तले हुए इस विरोध-प्रदर्शन में राजस्थान की ‘जनरल सेना’ और ‘चाणक्य सेना’ के साथ-साथ ‘करणी सेना’ भी शामिल हुई.

प्रदर्शन की अनुमति को लेकर बनी उलझन के बीच यह आयोजन हुआ है. प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और धार्मिक नारे भी लगाए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST एक्ट का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसी के खिलाफ कानूनों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. साथ ही सरकार से ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की.

हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि हजारों लोग इसमें शामिल हुए. ये प्रदर्शन दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई कड़ी सुरक्षा और पाबंदियों के बीच हुआ है. जंतर-मंतर के चारों ओर बैरिकेड्स लगाए गए थे. दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और ITBP के जवानों को मौके पर तैनात किया गया था.प्रदर्शन को लेकर कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स की ओर से ये कहा गया कि इस प्रदर्शन में लोगों की भागीदारी ने उस नैरेटिव को भी गलत साबित कर दिया है कि ऐसे प्रदर्शनों में ज़्यादा लोग नहीं जुटते.

#WATCH दिल्ली: दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स जंतर-मंतर पहुँची, जहाँ जाति-आधारित आरक्षण के विरोध में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए हैं। pic.twitter.com/F4UxH4bTCL

— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 21, 2026

‘भीड़ को पैसे देकर नहीं बुलाया गया’

प्रदर्शन को लेकर ‘रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन’ के X हैंडल ने एक पोस्ट में कहा, इसे किसी राजनीतिक पार्टी या विदेशी एजेंसी से फंडिंग नहीं मिलती है. जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए जुटी भीड़ को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया है. यह विरोध प्रदर्शन सिस्टम में निष्पक्षता लाने और देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किया जा रहा है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है, हमारी मांग है कि मिल रहे आरक्षण को लेकर सरकार एक श्वेत पत्र लाए. दूसरी मांग है कि ‘कोटा के अंदर कोटा’ की है, जिस पर सरकार ने यह भी कहा है कि हम इसमें ‘क्रीमी लेयर’ लागू नहीं करेंगे. आप इसे लागू क्यों नहीं करेंगे? सरकार कुछ दलित नेताओं के आगे झुक रही है जो सिर्फ अपने जाति समूह की बात करते हैं.

प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत कुमार द्विवेदी ने साल 2017 में अमर उजाला कानपुर से करियर की शुरुआत की. अगस्त 2019 से अक्टूबर 2021 तक अमर उजाला जम्मू कश्मीर में काम किया. इसके बाद एक साल अमर उजाला नोएडा में काम करने का मौका मिला. साल 2022 में आज तक डिजिटल में बतौर चीफ सब एडिटर ज्वाइन किया. सीएसजेएमयू कानपुर से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके प्रशांत सुरक्षा, कश्मीर मामले, क्राइम और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम करते हैं. वर्तमान में TV9 डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. नौकरी के अलावा खेल-कूद और किताबें पढ़ने में दिलचस्पी है. विशेष रूप से फिलासफी. इसके साथ ही ट्रेवलिंग पसंद है, खासतौर पर माउंटेन एरियाज में समय बिताना बहुत पसंद है. इन सबके बीच गांव, बेजुबानों और बुजुर्गों से विशेष लगाव रखते हैं.

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