
हर साल दुनियाभर के सैलानी जयपुर की खूबसूरती देखने आते हैं. (सांकेतिक/pti)
पिंक सिटी के नाम से मशहूर जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे (Walled City) की वैश्विक पहचान और ‘UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ के दर्जे को बचाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम प्रशासन में हलचल तेज हो गई है. जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की कोर्ट द्वारा 2 हफ्ते में एक्शन प्लान तलब किए जाने के बाद नगर निगम की नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर सरोज कंवर ने साफ कर दिया है कि हेरिटेज स्वरूप की रक्षा के लिए अधिकारियों की बैठक लेकर विशेष निगरानी कमेटी बना दी गई है.
दूसरी ओर, हेरिटेज कमेटी के सदस्य और किशनपोल क्षेत्र से विधायक अमीन कागजी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि परकोटे में ऐतिहासिक हवेलियों को तोड़कर अवैध रूप से बहुमंजिला कॉम्प्लेक्स और 50-50 कमरों के रेस्टोरेंट खड़े किए जा रहे हैं, जिस पर समय रहते रोक नहीं लगी तो दुनिया के चार शहरों की तरह जयपुर से भी हेरिटेज का दर्जा छिन सकता है.
दिसंबर 2026 तक का अल्टीमेटम
राजस्थान हाईकोर्ट ने परकोटा क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि दिसंबर 2026 से पहले सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर यूनेस्को की ओर से जारी ‘वर्ल्ड हेरिटेज सिटी’ की मान्यता खो सकता है. कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और जयपुर नगर निगम से 5 साल का हिसाब मांगते हुए पूछा है कि कितने अवैध निर्माण पकड़े गए और जिम्मेदार अफसरों पर क्या-क्या कार्रवाई की गई?
हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद नवनिर्वाचित डिप्टी मेयर सरोज कंवर ने दावा किया है कि अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दे दिए गए हैं कि चारदीवारी के मूल स्थापत्य से कोई खिलवाड़ नहीं होगा और अवैध निर्माण पर सीधी नजर रखने के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है.
ऐतिहासिक हवेलियों को तोड़ा जा रहाः अमीन
हेरिटेज कमेटी के सदस्य और क्षेत्रीय विधायक अमीन कागजी का आरोप है कि परकोटे के पास 400 से 500 वर्ग गज की पुरानी और ऐतिहासिक हवेलियों को ध्वस्त कर धड़ल्ले से कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़े किए जा रहे हैं. हाल ही में लगी एक भीषण आग के दौरान यह खुलासा हुआ था कि एक इमारत के पीछे 50 कमरों का भारी-भरकम रेस्टोरेंट अवैध रूप से तैयार किया जा रहा था.
कांग्रेस के विधायक कागजी का कहना है कि वे आधिकारिक बैठकों में बार-बार इन अवैध निर्माणों का मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन निगम प्रशासन की अनदेखी के चलते परकोटे का मूल ढांचा बर्बाद हो रहा है. यदि यूनेस्को के नियमों की यही अनदेखी जारी रही, तो जयपुर का हश्र भी उन चार शहरों जैसा होगा, जिनका हेरिटेज दर्जा यूनेस्को वापस ले चुका है.
नगर निगम-JDA के पास टैग बचाने की चुनौती
कोर्ट और यूनेस्को की रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी जयपुर में पारंपरिक हवेलियों को तोड़कर उनकी जगह आधुनिक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं. साल 1991 में जयपुर में करीब 1,200 हवेलियां थीं, और अब यह घटकर महज 800 रह गई हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दिए गए अल्टीमेटम के बाद अब गेंद नगर निगम और जेडीए के पाले में है. देखना होगा कि कागजी कमेटियों से आगे बढ़कर क्या प्रशासन परकोटे की ऐतिहासिक हवेलियों और गुलाबी आभा को बचाने के लिए कोई जमीनी कार्रवाई कर पाता है या नहीं.

ध्वज आर्य
राजस्थान में 2008 से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत. 18 वर्षों के पत्रकारिता करियर में राजनीति, सामाजिक मुद्दे, विकास, अपराध और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम. खबर की तह तक जाने, तथ्यों की पुष्टि करने और जटिल विषयों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने में विशेषज्ञता. प्रिंट से डिजिटल मीडिया तक के बदलाव को करीब से देखा. प्रिंट ,डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्लेटफार्म पर काम का अनुभव. पत्रकारिता की शुरुआत के 10 साल क्राइम रिपोर्टिंग की. पूर्व में समाचार प्लस, इंडिया न्यूज, दैनिक भास्कर और अब नेशनल चैनल TV9 भारतवर्ष में राजस्थान ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी. इस सफर के दौरान ब्रेकिंग न्यूज से लेकर इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के साथ कई बड़े खुलासे, कई बड़े चुनाव, आपदा, बड़े आंदोलनों की ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज समेत भारत पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) को कवर किया. क्राइम की खबरों, बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और युद्ध कवरेज में सबसे ज्यादा रूचि. मेरा मानना है कि खबर सिर्फ एक घटना नहीं है, उसके पीछे का सच भी है. पत्रकारिता का काम सत्ता पक्ष से सवाल पूछना और जनता की आवाज़ बनना है. निष्पक्षता, गति और सटीकता मेरी रिपोर्टिंग के तीन स्तंभ हैं.
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