उवैस चौधरी | इटावा19 मिनट पहले
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इटावा। चंबल के बीहड़ों से विकास की नई राह निकलने जा रही है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब इटावा से अटल एक्सप्रेसवे भी जुड़ेगा। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला 414 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे राजस्थान के कोटा को मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश के इटावा से जोड़ेगा।
पहले चंबल एक्सप्रेसवे के नाम से प्रस्तावित इस परियोजना का नाम अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में अटल एक्सप्रेसवे रखा गया है। यह एक्सप्रेसवे कोटा के सिमलिया से शुरू होकर मध्य प्रदेश के श्योपुर, सबलगढ़, मुरैना और भिंड होते हुए इटावा के निनावा तक पहुंचेगा। परियोजना की कुल लंबाई 414 किलोमीटर होगी, जिसमें राजस्थान में 94 किलोमीटर, मध्य प्रदेश में 273 किलोमीटर और उत्तर प्रदेश में 47 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है।
अटल एक्सप्रेसवे के बनने के बाद इटावा उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन जाएगा, जहां आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और अटल एक्सप्रेसवे- तीनों का जुड़ाव होगा। इससे इटावा प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे हब के रूप में उभरेगा और क्षेत्र में निवेश, उद्योग तथा रोजगार की नई संभावनाएं पैदा होंगी।

चंबल घाटी कभी डाकुओं की वजह से देशभर में बदनाम रही, लेकिन अब वही इलाका विकास की नई पहचान बनने की ओर बढ़ रहा है। एक्सप्रेसवे बनने से चंबल क्षेत्र के दूर-दराज गांवों, आदिवासी इलाकों और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। किसान अपनी उपज दिल्ली, मुंबई सहित बड़े बाजारों तक कम समय और कम लागत में पहुंचा सकेंगे। इससे मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
यह फोरलेन एक्सप्रेसवे पर्यटन को भी नई उड़ान देगा। इसके मार्ग पर रणथंभौर टाइगर रिजर्व, कूनो नेशनल पार्क और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल स्थित हैं। बेहतर सड़क संपर्क से इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
वर्तमान में कोटा से इटावा पहुंचने में करीब 12 घंटे का समय लगता है, लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी महज चार घंटे में तय की जा सकेगी। इस मार्ग पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। कोटा में यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जबकि इटावा में आगरा-लखनऊ और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से इसका संपर्क होगा।
स्थानीय शिवा भदौरिया का कहना है कि अटल एक्सप्रेसवे बनने से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि इटावा और चंबल क्षेत्र में विकास की नई दिशा मिलेगी। व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को चंबल क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
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