Published: Saturday, September 5, 2026, 11:20 [IST]
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार (5 सितंबर) सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने गिरा दिया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती रही। इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। लेकिन उनके घर के बाहर पुलिस पहुंच गई और उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया। इकरा हसन ने इसे हाउस अरेस्ट बताया है।
सहारनपुर प्रशासन का कहना है कि कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण माना था। मस्जिद कमेटी की ओर से इस आदेश के खिलाफ पहली अपील की गई, लेकिन वह भी खारिज हो गई। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। ऐसे में आइए जानते हैं कि इकरा हसन कौन हैं और उन्हें क्यों हाउस अरेस्ट किया गया है।
इकरा हसन को क्यों किया गया हाउस अरेस्ट?
मस्जिद गिराने से पहले ही सहारनपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ तैनात की। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पैदल गश्त और फ्लैग मार्च भी किया गया। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई थी। उनके मुताबिक नोटिस और अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण किया गया। डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में गलत सूचना फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी।
इसी कार्रवाई के बीच इकरा हसन सहारनपुर जाने वाली थीं। उनका कहना था कि वह प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और स्थानीय लोगों की बात उनके सामने रखना चाहती थीं। लेकिन उनके आवास पर पुलिस पहुंच गई और उन्हें बाहर जाने नहीं दिया गया।
इकरा हसन ने सवाल उठाया कि
"अगर कोई निर्वाचित सांसद अपनी जनता से जुड़े मामले में अधिकारियों से मिलने जाना चाहे, तो क्या उसे घर में रोक देना सही है? जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं, उन्हें रोकना उस आवाज को दबाने जैसा है।"
फिलहाल सहारनपुर में पुलिस की मौजूदगी बढ़ी हुई है और कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भी सुरक्षा कड़ी रखी गई है।
कौन हैं इकरा हसन? (Who is iqra hasan)
इकरा हसन 18वीं लोकसभा में कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। वह उत्तर प्रदेश के उन युवा नेताओं में गिनी जाती हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही सक्रिय राजनीति में पहचान बनाई। इकरा हसन का राजनीतिक सफर लोकसभा चुनाव से पहले ही शुरू हो चुका था।
वह करीब नौ साल से राजनीति में सक्रिय रही हैं। इससे पहले उन्होंने जिला पंचायत का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि वह मामूली अंतर से हार गई थीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका खास तौर पर चर्चा में आई। उस समय उनके बड़े भाई नाहिद हसन जेल में थे। इकरा हसन ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली। उनके प्रयासों के बीच नाहिद हसन चुनाव जीतने में कामयाब रहे।
इकरा हसन ऐसे परिवार से आती हैं, जहां राजनीति कई पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके दादा चौधरी अख्तर हसन ने 1984 में कैराना लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और उस चुनाव में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहीं मायावती को हराया था।
इकरा के पिता मुनव्वर हसन भी कैराना से सांसद रहे। उन्होंने 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था। बाद में वह बहुजन समाज पार्टी में चले गए। इकरा की मां तबस्सुम हसन भी कैराना से सांसद रह चुकी हैं। उनके भाई नाहिद हसन समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। यानी इकरा के लिए राजनीति कोई अचानक चुना गया रास्ता नहीं है। परिवार की राजनीतिक पकड़ ने उन्हें शुरुआती दौर से ही सियासत के करीब रखा।
इकरा हसन की पढ़ाई भी देश और विदेश दोनों जगह हुई है। शुरुआती शिक्षा उन्होंने कैराना में ली। 12वीं की पढ़ाई दिल्ली के क्वींस मैरी स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया।
आगे की पढ़ाई के लिए इकरा लंदन चली गईं। वहां उन्होंने स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज से अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनीति की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह भारत लौट आईं। राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद इकरा की पहचान उनकी सादगी और जमीन से जुड़े अंदाज के लिए भी बनी है। लोकसभा में उनकी सक्रियता ने भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।