Time Updated: Friday, October 23, 2026, 17:23 [IST]

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने एक चुनौती रखी है। राजभर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव वास्तव में मुसलमानों के हितों को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करना चाहिए।

अंबेडकर नगर में समाचार एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान राजभर ने अखिलेश यादव की आजम खान से जेल में हुई मुलाकात पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी को चुनाव नजदीक आने पर ही आजम खान और मुस्लिम समुदाय की याद आती है। राजभर के इस बयान से उत्तर प्रदेश में मुस्लिम नेतृत्व, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और 2027 के चुनाव में सपा की रणनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, अखिलेश यादव की ओर से किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की बात इस बयान के संदर्भ में सामने नहीं आई है।

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राजभर ने अखिलेश यादव को क्या चुनौती दी?

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अगर सपा प्रमुख मुसलमानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करना चाहते हैं, तो उन्हें केवल समर्थन मांगने के बजाय नेतृत्व में भागीदारी का भरोसा देना चाहिए। राजभर के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय अब राजनीतिक दलों से सिर्फ चुनावी समर्थन नहीं, बल्कि विधानसभा में प्रतिनिधित्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समान अधिकारों की मांग कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव को मुस्लिम समुदाय की इतनी ही चिंता है, तो उन्हें अभी घोषणा करनी चाहिए कि 2027 में सपा के नेतृत्व में सरकार बनने पर मुख्यमंत्री किसी मुस्लिम नेता को बनाया जाएगा। राजभर का यह बयान सीधे तौर पर सपा की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाता है।

आजम खान से मुलाकात पर क्यों उठाए सवाल?

अखिलेश यादव की आजम खान से जेल में हुई मुलाकात को लेकर भी राजभर ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख को चुनाव के समय ही अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं की याद आती है। राजभर ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक दलों में केवल प्रचार, समर्थन और चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे सत्ता और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपने सामाजिक और जातीय समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। मुस्लिम मतदाता राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सपा लंबे समय से इस समुदाय के समर्थन को अपने प्रमुख चुनावी आधारों में गिनती रही है।

आजम खान की चुनावी पात्रता का भी जिक्र

राजभर ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की टिप्पणी का समर्थन करते हुए आजम खान की चुनावी पात्रता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता लागू है, तो उसे चुनावी राजनीति में किस भूमिका में रखा जा सकता है। हालांकि, चुनाव लड़ने की पात्रता किसी व्यक्ति के खिलाफ आए अदालती फैसले, उसकी सटीक शर्तों और लागू कानूनी स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए आजम खान की अयोग्यता की अवधि और वर्तमान स्थिति को संबंधित न्यायिक आदेशों तथा निर्वाचन नियमों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। राजभर ने सपा पर मुस्लिम समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को शीर्ष नेतृत्व में मुस्लिम चेहरे को आगे लाने पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

2027 में मुस्लिम CM का मुद्दा कितना अहम?

राजभर के बयान के केंद्र में मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में चुनाव से पहले इस समुदाय को लेकर होने वाली बयानबाजी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

राजभर की चुनौती सपा पर दबाव बनाने की राजनीतिक कोशिश के तौर पर देखी जा सकती है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सपा 2027 में मुस्लिम मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने जा रही है।

MLC चुनावों में गड़बड़ी के आरोपों पर भी बोले राजभर

राजभर ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के चुनाव में सपा की ओर से लगाए गए प्रशासनिक दबाव के आरोपों को भी खारिज किया।

उन्होंने दावा किया कि विपक्ष अपनी संभावित हार को देखते हुए पहले से बहाने बना रहा है। राजभर ने कहा कि सपा को यदि चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत है, तो वह संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इन चुनावों में आम मतदाताओं के बजाय पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता हिस्सा लेते हैं।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मतदान के दौरान भाजपा की जीत का भरोसा जताया और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया। उन्होंने सपा के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें अपनी राजनीतिक साख बचाने की कोशिश करार दिया।

कांग्रेस और कानून-व्यवस्था पर भी साधा निशाना

राजभर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कांग्रेस को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि देश में कांग्रेस का राजनीतिक प्रभाव लगातार कम हो रहा है। वाराणसी में एयर शो को भाजपा के प्रचार कार्यक्रम में बदलने के कांग्रेस के आरोपों पर भी राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सैन्य अभ्यास और एयर शो को सुरक्षा तैयारियों का हिस्सा बताया।

इसके अलावा, राजभर ने सपा पर कानून-व्यवस्था और ब्राह्मण समुदाय से जुड़े मुद्दों पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सपा की कथनी और करनी में अंतर है।