प्रयागराज उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद अहम जिला है. वर्तमान में यहां 12 विधानसभा सीटें हैं. प्रयागराज की शहरी सीटों (जैसे इलाहाबाद उत्तर, दक्षिण और पश्चिम) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके संगठनात्मक नेटवर्क का असर मजबूत माना जाता है, वहीं फाफामऊ, फूलपुर, हंडिया और करछना जैसी ग्रामीण सीटों पर समाजवादी पार्टी (SP) व अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है.
निर्णायक वोट बैंक
ब्राह्मण, पटेल (कुर्मी), और दलित मतदाता यहां के चुनावी परिणामों में किंगमेकर की भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा युवा (Gen-Z) और महिला मतदाता भी इस बार बड़े बदलाव या समर्थन की बजह बन सकते हैं. फूलपुर के संबंध में उपचुनाव के कारण वर्तमान स्थिति अलग हो सकती है. फूलपुर सीट पर 2024 में उपचुनाव हुआ था, इसलिए 2027 के समीकरण को 2022 के नतीजे से अकेले नहीं समझा जा सकता. 2022 में BJP+ ने 12 में से 8 सीटें, जबकि सपा ने 4 सीटें जीती थीं.
विधानसभा सीट 2022: विजेता पार्टी की जीत का अंतर
| फाफामऊ | गुरु प्रसाद मौर्य | BJP | 14,324 |
| सोरांव (SC) | गीता शास्त्री | SP | 5,590 |
| प्रतापपुर | विजमा यादव | SP | 10,956 |
| हंडिया | हाकिम लाल बिंद | SP | 3,543 |
| मेजा | संदीप सिंह | SP | 3,439 |
| करछना | पीयूष रंजन निषाद | BJP | 9,328 |
| इलाहाबाद पश्चिम | सिद्धार्थ नाथ सिंह | BJP | 29,933 |
| इलाहाबाद उत्तर | हर्षवर्धन बाजपेयी | BJP | 54,883 |
| बारा (SC) | वाचस्पति | अपना दल (S) | 12,524 |
| कोरांव (SC) | राजमणि कोल | BJP | 24,487 |
| इलाहाबाद दक्षिण | नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ | BJP | 26,182 |
अब क्या है सियासी गणित?
1. BJP का मजबूत शहरी आधार
इलाहाबाद उत्तर, दक्षिण और पश्चिम-तीनों शहरी सीटों पर BJP का मजबूत प्रदर्शन रहा है. खासकर उत्तर सीट पर 2022 में हर्षवर्धन बाजपेयी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी.
2. सपा के लिए ग्रामीण बेल्ट अहम
सपा ने 2022 में सोरांव, प्रतापपुर, हंडिया और मेजा जीती थीं. यानी गंगा-यमुना के ग्रामीण और पिछड़ा-दलित प्रभाव वाले इलाकों में उसका आधार महत्वपूर्ण है.
3. PDA बनाम BJP का सामाजिक समीकरण
2027 को देखते हुए सपा की कोशिश यादव-मुस्लिम के पारंपरिक आधार के साथ पिछड़े, दलित और गैर-यादव OBC वोट को जोड़ने की है. प्रयागराज में यह रणनीति खास तौर पर हंडिया, सोरांव, मेजा और प्रतापपुर जैसी सीटों पर असर डाल सकती है. अगस्त 2026 की एक राजनीतिक रिपोर्ट में भी सपा के 4 से बढ़कर 7 सीटों तक पहुंचने के लक्ष्य/आकलन का उल्लेख किया गया है.
4. BJP के सामने एंटी-इनकंबेंसी और अंदरूनी खींचतान
मौजूदा चुनावी चर्चा में BJP के लिए सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि स्थानीय गुटबाजी और एंटी-इनकंबेंसी भी चुनौती के रूप में सामने आ रही है.
5. अपना दल (S) की भूमिका
बारा जैसी सीटों पर BJP के सहयोगी दल का अपना सामाजिक आधार है. इसलिए NDA का सीट बंटवारा और सहयोगी दलों का प्रदर्शन भी कुल 12 सीटों के गणित को प्रभावित करेगा. वर्तमान विधानसभा रिकॉर्ड में बारा के विधायक वाचस्पति अपना दल के हैं.
जातिगत समीकरण
सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति और कांग्रेस के साथ संभावित तालमेल की वजह से यहां के राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो गए हैं. वहीं, सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन अपने जनाधार और बूथ-स्तरीय मजबूती को लेकर पूरी ताकत लगा रहा है.
सबसे दिलचस्प बात
प्रयागराज को लेकर एक पुराना राजनीतिक ट्रेंड भी चर्चा में रहा है—2007, 2012 और 2017 में जिले में जिस दल/गठबंधन ने सबसे ज्यादा विधानसभा सीटें जीतीं, प्रदेश में उसी की सरकार बनी. 2022 में भी BJP गठबंधन ने जिले में 8 सीटें जीतकर यह बढ़त कायम रखी.
2027 के लिए मोटे तौर पर मुकाबला
BJP/NDA की चुनौती है 2022 की 8 सीटों को बचाना है. वहीं सपा के लिए चुनौती अपनी 4 सीटों से आगे बढ़कर ग्रामीण सीटों में सेंध लगानी है. निर्णायक फैक्टर के तौर पर PDA वोट, गैर-यादव OBC, दलित वोट, मुस्लिम वोट, शहरी मतदाता और उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ रहने वाली है.