Time Published: Friday, August 7, 2026, 10:24 [IST]

UPI Payment Rules: देश में डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव आने की संभावना बन गई है। लोकसभा ने गुरुवार को कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के जरिए सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह भविष्य में UPI और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला कर सके। अभी तक UPI लेनदेन पर किसी तरह का MDR नहीं लगता था, जबकि कई अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर यह व्यवस्था पहले से मौजूद है।

सरकार ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि UPI पर कोई शुल्क लगेगा या नहीं और यदि लगेगा तो उसकी दर क्या होगी। हालांकि इस बदलाव के बाद जरूरत पड़ने पर सरकार अलग-अलग डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए अलग नीति बना सकेगी। इसी विधेयक में डेटा सेंटर, विदेशी निवेश और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े कई अहम बदलाव भी शामिल किए गए हैं।

UPI Payment Rules

लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। इसके जरिए सरकार को बैंकों और अन्य भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों को UPI और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर MDR लागू करने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा।

क्या है इस बदलाव का मकसद?

यह विधेयक उस मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव करता है, जिसके तहत बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को कुछ अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लगाने की अनुमति नहीं थी। सरकार अब इस रोक को हटाकर भविष्य में जरूरत के अनुसार शुल्क तय कर सकेगी।

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MDR क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर पेमेंट सेवा देने वाली कंपनियां कारोबारियों से लेती हैं। अभी यह शुल्क कई कार्ड आधारित लेनदेन पर लागू होता है, लेकिन UPI ट्रांजैक्शन पर कारोबारियों को भी यह भुगतान नहीं करना पड़ता।

विधेयक पास होने का मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत चार्ज लग जाएगा। सरकार ने फिलहाल किसी भी तरह की MDR दर घोषित नहीं की है। फिलहाल UPI और रुपे आधारित भुगतान पहले की तरह बिना MDR के जारी रहेंगे।

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?

मौजूदा नियमों के अनुसार कोई भी कारोबारी सीधे ग्राहक से MDR नहीं वसूल सकता। यानी यदि भविष्य में UPI पर MDR लागू होता है तो यह शुल्क कारोबारियों को देना होगा, ग्राहकों को नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारी अपनी लागत की भरपाई दूसरे तरीकों से कर सकते हैं। ऐसे में इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

RTGS और NEFT में पहले से लगता है शुल्क

देश में RTGS और NEFT जैसे रियल-टाइम बैंकिंग माध्यमों से होने वाले कुछ लेनदेन पर पहले से सेवा शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI को अब तक इस तरह के शुल्क से छूट मिली हुई थी। नए संशोधन के बाद सरकार जरूरत पड़ने पर अलग-अलग डिजिटल भुगतान माध्यमों के लिए अलग नियम बना सकेगी।

सरकार को मिलेगा यह नया अधिकार

  • सरकार तय करेगी कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर MDR लागू किया जाएगा।
  • अलग-अलग भुगतान व्यवस्था के लिए अलग नीति बनाई जा सकेगी।
  • फिलहाल UPI और रुपे पर कोई MDR लागू नहीं किया गया है।
  • भविष्य में जरूरत के अनुसार शुल्क की दर और नियम तय किए जा सकेंगे।

डेटा सेंटर और विदेशी निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 में डिजिटल भुगतान के अलावा तकनीक और निवेश से जुड़े कई अहम बदलाव भी किए गए हैं।

  • विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए कई मंजूरी संबंधी शर्तों में राहत दी जाएगी।
  • डेटा सेंटर अब लीज या किराये के मॉडल पर भी संचालित किए जा सकेंगे।
  • सरकार का लक्ष्य भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटर का बड़ा केंद्र बनाना है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, विदेशी निवेश और पूंजी बाजार को बढ़ावा देने के लिए भी कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।

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