बसपा प्रमुख मायावती ने 15 अक्टूबर से लागू होने जा रही यूपीआई की नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट MDR व्यवस्था को मुनाफाखोरी बताते हुए केंद्र पर निशाना साधा है। साथ ही उन्होंने यूपी के स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट पर भी सवाल उठाए।

BSP national president Mayawati (file photo)

बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती (फाइल फोटो)

  • Published: 18 Sep 2026, 02:39 PM IST
  • Last Updated: 18 Sep 2026, 02:39 PM IST

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार द्वारा आगामी 15 अक्टूबर से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस UPI पर लागू की जाने वाली नई शुल्क व्यवस्था को लेकर कड़ा प्रहार किया है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों को ‘स्मार्ट स्कूल’ में तब्दील करने की योजना के बजट और प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े किए हैं।  

​डिजिटल लेनदेन पर शुल्क मुनाफाखोरी का रवैया

बसपा सुप्रीमो ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि सरकार ने पहले डिजिटल लेनदेन को जमकर बढ़ावा दिया और अब उस पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे प्रथमदृष्टया मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत दोनों हाथों से की जा रही टैक्स वसूली करार दिया। मायावती ने कहा कि इस नई व्यवस्था को चाहे जो भी तकनीकी नाम दिया जाए, इसका अंतिम भार आम जनता पर ही पड़ेगा और उनकी जेब कटेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी पहले से ही भीषण गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे में सरकार की नीतियां व्यावसायिक लाभ कमाने की बजाय जनकल्याणकारी होनी चाहिए।  

​स्मार्ट स्कूल बनाने से पहले बुनियादी सुविधाएं दें

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से 14,500 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' बनाने की कैबिनेट स्वीकृति पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने कहा कि बच्चों की शिक्षा का स्तर सुधारना अच्छी बात है, लेकिन प्राथमिकताएं तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को कथित 'स्मार्ट पढ़ाई' से पहले बुनियादी जरूरतें मुहैया कराई जानी चाहिए।  

​मायावती ने पूछा कि क्या प्रति स्कूल लगभग दो लाख रुपये के बजट में जर्जर भवनों की मरम्मत, छत, डेस्क-बेंच, किताबें, खेल का मैदान, स्वच्छ शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो पाएंगी? उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह प्राथमिक शिक्षा की जमीनी हकीकत को समझे और केवल डिजिटल औपचारिकता पूरी करने की बजाय जमीनी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे।