वॉशिंगटन डीसी/तेहरान6 घंटे पहले

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अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों नेताओं को वीजा दे दिया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार होगा, जब ईरान के शीर्ष नेता अमेरिका पहुंचेंगे।

बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका में ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान की गिरफ्तारी हो सकती है?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने 24 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNGA के 80वें सत्र को संबोधित किया था।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने 24 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNGA के 80वें सत्र को संबोधित किया था।

पजशकियान के पास खास कानूनी सुरक्षा

ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान न्यूयॉर्क में गिरफ्तार नहीं हो पाएंगे। इसकी दो बड़ी वजहें हैं।

1. राष्ट्रपति को खास कानूनी सुरक्षा मिलती है

किसी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को दूसरे देश में जाकर सीधे गिरफ्तार करना आसान नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मौजूदा राष्ट्राध्यक्षों को खास कानूनी सुरक्षा मिलती है।

इसका मकसद यह है कि कोई देश अपनी मर्जी से दूसरे देश के मौजूदा राष्ट्रपति को गिरफ्तार न कर सके।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि राष्ट्रपति पर कभी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस अदालत में है, आरोप क्या हैं और उस देश के कानून क्या कहते हैं।

निकोलस मादुरो का मामला इसका उदाहरण है। उन्हें अमेरिका ने गिरफ्तार किया था, लेकिन अमेरिका उन्हें उस समय वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति नहीं मानता था।

2. UNGA के लिए अमेरिका की अलग जिम्मेदारी है

यह मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच का नहीं है। UN का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और अमेरिका इसकी मेजबानी करता है।

इसलिए UN की बैठकों में हिस्सा लेने वाले दूसरे देशों के प्रतिनिधियों को अमेरिका आने की अनुमति देना उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

UN के नियमों के मुताबिक अमेरिका ऐसा नहीं कर सकता कि किसी विदेशी प्रतिनिधि को UN के आधिकारिक काम में हिस्सा लेने से ही रोक दे। हालांकि, UN के बाहर उसकी आवाजाही पर पाबंदी लगाई जा सकती है।

इसी वजह से पजशकियान और अराघची को अमेरिका आने की अनुमति दी गई है। लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल छोटा रखा गया है और उसके सदस्यों की आवाजाही भी सीमित रहेगी।

यात्रा और खरीदारी पर पाबंदियां रहेंगी

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरानी अधिकारियों की न्यूयॉर्क में आवाजाही सीमित रहेगी। वे सिर्फ कुछ तय जगहों पर ही जा सकेंगे।

आमतौर पर ऐसे अधिकारियों को UN मुख्यालय, ईरान के UN मिशन और कुछ तय इलाकों के बीच ही आने-जाने की अनुमति होती है।

इसके अलावा लग्जरी सामान और कुछ दूसरी चीजें खरीदने पर भी रोक रहेगी। अमेरिका पहले भी ईरानी अधिकारियों पर इस तरह की पाबंदियां लगा चुका है।

क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी?

UNGA के दौरान इस बात पर भी नजर रहेगी कि क्या अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच कोई बातचीत होती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल के महीनों में कई बार कह चुके हैं कि उनके प्रशासन और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। हालांकि ईरान ने इस तरह की बातचीत से इनकार किया है।

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति को दूसरे साल भी वीजा नहीं मिला

ईरानी नेताओं को वीजा देने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को UNGA में शामिल होने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है।

अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) से जुड़े कई अधिकारियों पर भी पाबंदियां लगाई हैं। लगातार दूसरे साल अब्बास को अमेरिका आने की अनुमति नहीं मिली है।

पिछले साल की तरह इस बार भी उन्हें वीडियो के जरिए UNGA को संबोधित करने की अनुमति दी गई है।

अमेरिका का कहना है कि यह फैसला फिलिस्तीनी नेतृत्व की कुछ नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इजराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से जुड़े कदमों की वजह से लिया गया है।

वहीं, फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इसका विरोध किया है। उसका कहना है कि ऐसे कदम शांति और राजनीतिक समाधान की कोशिशों को कमजोर करते हैं।

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने सितंबर 2025 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए UNGA को संबोधित किया था।

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने सितंबर 2025 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए UNGA को संबोधित किया था।

UNGA में युद्ध और तेल पर भी चर्चा होगी

इस बार UNGA ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया में कई बड़े संघर्ष चल रहे हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भी चर्चा में रहेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी असर एक बड़ा मुद्दा होगा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का असर तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ा है।

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