रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की विशेष योजना में उम्मीद से ज्यादा डॉलर आने से रुपया 94.4850 पर बंद हुआ। यह 25 जून के बाद रुपये का सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर और 27 जुलाई के बाद सबसे बड़ी दैनिक बढ़त है।

RBI Indian rupee vs dollar

RBI Indian rupee vs dollar

  • Published: 03 Sep 2026, 06:20 PM IST
  • Last Updated: 03 Sep 2026, 05:53 PM IST

भारतीय रुपया गुरुवार को डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 94.4850 पर बंद हुआ। यह करीब 10 हफ्ते का सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर है। रुपये में एक दिन में 0.5% की तेजी आई और यह 27 जुलाई के बाद की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त रही।

RBI की स्कीम से उम्मीद से ज्यादा डॉलर आया
रुपये की मजबूती की सबसे बड़ी वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की विशेष योजना के तहत उम्मीद से ज्यादा डॉलर का भारत आना रहा। बाजार को इससे संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक के पास अब रुपये को संभालने के लिए पर्याप्त डॉलर उपलब्ध हैं और वह जरूरत पड़ने पर ज्यादा सक्रिय तरीके से बाजार में दखल दे सकता है।

शिनहन बैंक के ट्रेजरी हेड कुणाल सोढ़ानी के मुताबिक, उम्मीद से ज्यादा डॉलर की आमद भारतीय रिजर्व बैंक की स्थिति को काफी मजबूत करती। उनके अनुसार, केंद्रीय बैंक की रणनीति अब सिर्फ रुपये को गिरने से रोकने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह दोनों दिशाओं में रुपये को मैनेज कर सकता है।

सुबह 94.30 पर खुला रुपया, फिर मुनाफा घटा
भारतीय रुपया गुरुवार को 94.30 प्रति डॉलर पर खुला था। शुरुआती तेजी के बाद आयातकों की डॉलर मांग बढ़ी और रुपये की बढ़त कुछ कम हो गई। कारोबार के दौरान यह 94.49 तक कमजोर हुआ, लेकिन अंत में 94.4850 पर बंद हुआ।

RBI की फॉरवर्ड डॉलर पोजीशन पहले ही करीब 137 अरब डॉलर है। ऐसे में ज्यादा डॉलर सप्लाई मिलने से केंद्रीय बैंक के पास तेज उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश बनती है।

महंगा कच्चा तेल बन सकता है बड़ी चिंता
फिलहाल रुपये को राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़ी चिंता बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव से क्रूड की कीमतों में तेजी आई है।

अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे व्यापार घाटे पर दबाव आएगा। ऐसे माहौल में आयातक पहले से डॉलर खरीदकर अपनी जरूरत सुरक्षित करने की कोशिश कर सकते हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

यूएस में ब्याज दर बढ़ने की आशंका से भी दबाव
कच्चे तेल की तेजी से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इसका असर दुनियाभर के बॉन्ड यील्ड पर पड़ा है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इस महीने ब्याज दर बढ़ाने की संभावना भी मजबूत हुई है।

10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 4.78% रही, जो लगभग तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर के आसपास है। सितंबर में फेड की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना करीब 63% आंकी जा रही है।

यानी फिलहाल RBI की डॉलर आमद से रुपये को मजबूती मिली है, लेकिन महंगा तेल और अमेरिकी ब्याज दरों की तस्वीर आने वाले दिनों में इसकी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

(प्रियंका कुमारी)