नवरात्रि के त्योहार में जहां हर जगह भक्ति और आस्था की दीपक जलता है, वहीं इस दौरान कुछ हादसों ने कई घरों के दीपक बुझा दिए। कोलकाता से ग्वालियर और हैदराबाद तक..आस्था और उत्सव के बीच तीन दर्दनाक हादसों ने मातम पसार दिया। कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हैं। संकरे रास्ते में भीड़ फंसी और लोगों को संभलने तक की जगह नहीं मिली। ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास बेकाबू ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। 15 लोगों की मौत हुई, जबकि 26 लोग घायल हैं। ड्राइवर और ट्रक मालिक गिरफ्तार हैं। वहीं हैदराबाद में डांडिया कार्यक्रम के दौरान लाइटिंग का भारी आर्च गिरने से एक छात्रा समेत दो लोगों की मौत हो गई। 14 लोग घायल हैं। तीनों हादसों ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्वालियर में नवरात्रि में माता के दर्शन की आस लेकर पहुंचे श्रद्धालुओं को क्या पता था कि मंदिर के दरवाजे पर मौत उनका इंतजार कर रही है। शीतला माता मंदिर के पास एक बेकाबू ट्रक ने खुशियों और आस्था के माहौल को मातम में बदल दिया। 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 26 लोग घायल हैं। हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठे, तो सरकार ने भी बड़ा एक्शन लिया है। रात करीब डेढ़ बजे चीनौर रोड पर शीतला माता मंदिर के पास श्रद्धालु दर्शन के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े थे। तभी चीनौर की तरफ से धान से भरा एक ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। ट्रक पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ता हुआ भीड़ में घुसा। 41 श्रद्धालुओं को कुचलने के बाद मंदिर के गेट और बाहरी दीवार से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दीवार ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हैं। घायलों का जयारोग्य अस्पताल में इलाज चल रहा है..ड्राइवर दिलबाग ने पुलिस को बताया कि ट्रक के ब्रेक फेल हो गए थे..शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ट्रक डबरा मंडी से धान लेकर आ रहा था। पुलिस ने ड्राइवर और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है।

उधर, हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बैरिकेडिंग तोड़कर ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा ? राहत-बचाव में देरी क्यों हुई? मौके पर एंबुलेंस और क्रेन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। हादसे की न्यायिक जांच और स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने की मांग की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया। मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया। केंद्रीयमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्रवाई करते हुए सिटी एसपी को हटाया और आठ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सवाल अब यही है कि आस्था के इतने बड़े केंद्र पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा में चूक कैसे हुई और इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?

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