विश्व हिंदू परिषद ने राहुल गांधी की मनुस्मृति पर टिप्पणी और छात्राओं से पितृसत्ता खत्म करने के आह्वान की आलोचना की है।

राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर विश्व हिंदू परिषद का पलटवार

राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर विश्व हिंदू परिषद का पलटवार

HighLights

  1. विहिप ने राहुल गांधी की मनुस्मृति टिप्पणी की आलोचना की।

  2. राहुल ने पुणे में छात्राओं से बातचीत में मनुस्मृति का जिक्र किया।

  3. विहिप ने राहुल को अन्य धर्मों पर भी टिप्पणी की चुनौती दी।

पीटीआई, नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने रविवार को राहुल गांधी की मनुस्मृति वाला सोच वाली टिप्पणी और छात्राओं से पितृसत्ता को खत्म करने के आह्वान की आलोचना की।

विहिप ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता दूसरे धर्मों में महिलाओं के बारे में कही गई बातों को भी सार्वजनिक रूप से बताने की हिम्मत दिखाएंगे।

छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल ने किया था जिक्र

राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से बातचीत करते हुए मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र किया था। इसमें कहा गया है कि लड़की को बचपन में अपने पिता की बात माननी चाहिए, जवानी में वह अपने पति की होती है और पति की मृत्यु के बाद वह बेटों की होती है।

राहुल ने कहा था कि महिलाओं अपनी खुद की होती हैं, न कि वे अपने पिता, पति या बेटों की होती है। उन्होंने मनुस्मृति की इस बात को शर्मनाक बताया था कि महिला को जीवन के हर चरण में अपने पुरुष रिश्तेदारों के अधिकार में रहना चाहिए।

दूसरे धर्मों पर करें टिप्पणी

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने उनकी इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक्स पर राहुल गांधी से कहा, "आपके लिए मनुस्मृति से बिना उसे समझे एक श्लोक चुनना और हिंदू समाज को कठघरे में खड़ा करना बहुत आसान है। अपने दूषित सोच से देश के युवाओं के साफ मन में जहर मत घोलिए।"

राहुल को चुनौती देते हुए बंसल ने कहा कि वह कुरान, बाइबिल और अन्य अब्राहमिक धर्मग्रंथों में महिलाओं के बारे में कही गई बातों को भी सार्वजनिक रूप से बताने की हिम्मत दिखाएं।

उन्होंने कहा कि राहुल को पहले पूरी मनुस्मृति पढ़नी चाहिए, संतों एवं टीकाकारों के पास बैठकर उन्हें समझना चाहिए और फिर हिंदू समाज को प्रमाण-पत्र देना चाहिए। चुनिंदा बातें बताने और उनके गलत अर्थ निकालने से राजनीति तो दूषित हो सकती है, लेकिन सच सामने नहीं आता।

मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए बंसल ने दावा किया कि नारी शक्ति देश की सभ्यता की पहचान रही है। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा इसे राजनीतिक भाषणों के लिए मनुस्मृति बनाम संविधान की लड़ाई में बदलने को इतिहास व संस्कृति दोनों के साथ अन्याय बताया।