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'वाइब' (Vibe) एक ऐसी स्पाई कॉमेडी है, जो जासूसी की गंभीर दुनिया में दो ऐसे दोस्तों को पहुंचा देती है, जिन्हें शायद इस मिशन का हिस्सा होना ही नहीं चाहिए था। कुणाल खेमू और स्पर्श श्रीवास्तव की जोड़ी मूवी में खूब मनोरंजन करती है। लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ-साथ कुछ उलझती भी है। वहीं, प्रीति जिंटा का एक्शन-कॉमेडी अवतार उनकी पिछले किरदार से अलग नजर आता है। फिल्म में यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव भी इंटेलिजेंस टीम का हिस्सा हैं और कॉमेडी में अपना योगदान देते हैं।

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Vibe देखने के 5 कारण

कुणाल खेमू की कॉमेडी

फिल्म में कुणाल खेमू ने हार्दिक का किरदार निभाया है। वह एक ऐसे शख्स के रूप में नजर आते हैं, जो मुश्किल हालात में भी अपनी हरकतों से कॉमेडी पैदा कर देता है। उनकी कॉमिक टाइमिंग फिल्म की बड़ी ताकत है।

कुणाल और स्पर्श की कॉमेडी से भरी दोस्ती

हार्दिक और बग्स यानी स्पर्श श्रीवास्तव के किरदार फिल्म के केंद्र में हैं। दोनों की दोस्ती, नोकझोंक और मुश्किल परिस्थितियों में साथ फंसना कई मजेदार सीन को जन्म देता है। दोनों की केमिस्ट्री फिल्म के उन हिस्सों में सबसे ज्यादा असरदार लगती है, जहां कहानी जासूसी से ज्यादा उनकी दोस्ती पर ध्यान देती है।

स्पाई फिल्म का हल्का-फुल्का अंदाज

अगर आपको बहुत गंभीर और भारी-भरकम जासूसी फिल्म के बजाय कॉमेडी के साथ स्पाई कहानी देखना पसंद है, तो 'वाइब' का अंदाज अलग लग सकता है। फिल्म जानबूझकर जॉनर की गंभीरता को हल्का करती है और दो आम लोगों को एक बड़े मिशन में फंसा देती है।

प्रीति जिंटा का अलग रोल

प्रीति जिंटा फिल्म में मैडम एच के किरदार में हैं, जो इस पूरे मिशन को लीड करती हैं। फिल्म में उन्हें एक्शन और कॉमेडी के अलग अंदाज में देखने का मौका मिलता है।

पहला हाफ पकड़ बनाए रखता है

फिल्म का पहला हिस्सा इसके मजबूत पक्षों में शामिल है। तेज रफ्तार, वन-लाइनर्स और Hardik-Bugs की जोड़ी मिलकर कई जगह अच्छी कॉमेडी पैदा करती है। यही हिस्सा फिल्म को शुरुआत में अच्छी गति देता है।

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Vibe न देखने के 5 कारण

दूसरे हाफ में कहानी ज्यादा उलझ जाती है

इंटरवल के बाद फिल्म का फोकस सिर्फ कॉमेडी से आगे बढ़कर कई ट्विस्ट और दूसरी कहानी की परतों पर चला जाता है। कुछ रिव्यूज के मुताबिक इसी वजह से पहले हाफ वाली सहजता कम हो जाती है।

हर कॉमेडी सीन एक जैसा असर नहीं छोड़ता

फिल्म में कॉमेडी लगातार मौजूद है, लेकिन स्क्रीनप्ले कई बार एक के बाद एक गैग और ट्विस्ट जोड़ता जाता है। इससे कुछ हिस्सों में हास्य का असर कमजोर महसूस हो सकता है।

स्पाई कहानी जरूरत से ज्यादा बड़ी हो जाती है

वाइब की असली ताकत Hardik और Bugs की दोस्ती में है। लेकिन जब फिल्म गैंगस्टर, सीक्रेट आइडेंटिटी और दूसरे बड़े ट्विस्ट को ज्यादा जगह देती है, तो कहानी का मूल कॉमिक अट्रैक्शन कुछ पीछे चला जाता है।

गंभीर स्पाई थ्रिलर की उम्मीद न रखें

अगर आप एक टाइट और गंभीर जासूसी फिल्म देखने की उम्मीद से थिएटर जा रहे हैं, तो वाइब का टोन अलग मिल सकता है। यह फिल्म स्पाई जॉनर को गंभीरता से लेने के बजाय उसके साथ कॉमेडी और अजीबोगरीब सिचुएशन का इस्तेमाल करती है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत ही इसकी सीमा भी बनती है

वाइब जब अपने दो मुख्य किरदारों की दोस्ती और कॉमेडी पर रहती है, तब ज्यादा सहज लगती है। लेकिन जब कहानी लगातार बड़े ट्विस्ट जोड़ती है, तो वही सहजता कम होती दिखाई देती है। यही वजह है कि फिल्म का असर सभी हिस्सों में एक जैसा नहीं रहता।

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