Viral: 80% कैश, 20% UPI का फॉर्मूला अपनाकर बैठाया लड़की ने अपना बजट, बदली पैसों को देखने की सोच

पैसों को बचाने का फॉर्मूला Image Credit source: Instagram/rockstarz.gf

ऑनलाइन पेमेंट ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही इसने खर्च करने की आदतों को भी बदल दिया है. आज ज्यादातर लोग छोटी से छोटी खरीदारी के लिए भी UPI का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दिल्ली की रहने वाली कंटेंट क्रिएटर सदफ ने एक ऐसा एक्सपेरिमेंट किया, जिससे उन्हें काफी ज्यादा फायदा हुआ. सदफ ने करीब दो महीने से भी ज्यादा समय तक अपनी रोजमर्रा की खरीदारी के लिए UPI की जगह नकद पैसे यानी कैश का इस्तेमाल किया. उन्होंने इस एक्सपीरियंस को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए शेयर किया और बताया कि इस छोटे से बदलाव ने उनके खर्च करने के तरीके पर बड़ा असर डाला.

वीडियो में उन्होंने बताया कि वह अब अपने प्रयोग के तीसरे महीने में हैं और ज्यादातर खर्च अभी भी कैश से ही कर रही हैं. उनके मुताबिक, सबसे बड़ा बदलाव यह आया कि अब उन्हें हर खर्च साफ-साफ महसूस होने लगा है. पहले UPI से पेमेंट करते समय पैसे खर्च होने का एहसास ही नहीं होता था. कुछ सेकंड में एक के बाद एक कई पेमेंट हो जाते थे और पता ही नहीं चलता था कि कुल कितना पैसा निकल गया. उन्होंने एग्जामपल देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति कॉफी पी ले, कुछ स्नैक्स खरीद ले और बीच में कोई ऑनलाइन ऑर्डर भी कर दे, तो देखते ही देखते करीब एक हजार रुपये खर्च हो सकते हैं. लेकिन डिजिटल पेमेंट करते समय यह रकम उतनी बड़ी नहीं लगती, क्योंकि हर ट्रांजैक्शन अलग-अलग होता है.

कैश रखने के बाद क्या आती है मुसीबत?

इसके उलट जब उन्होंने कैश का इस्तेमाल शुरू किया तो हर बार जेब से नोट निकालकर देना उन्हें सोचने पर मजबूर करता था. अगर 500 रुपये का नोट देना पड़ता, तो तुरंत महसूस होता कि जेब से कितनी रकम निकल रही है और अब कितना पैसा बचा है. यही एहसास उन्हें गैरजरूरी खरीदारी से रोकने लगा. सदफ का कहना है कि कैश में खर्च करने से उन्होंने बिना सोचे-समझे होने वाली शॉपिंग काफी हद तक कम कर दी. साथ ही बजट बनाना भी आसान हो गया. पहले उन्हें बार-बार बैंकिंग ऐप खोलकर बैलेंस चेक करना पड़ता था, लेकिन अब जेब में रखे पैसों को देखकर ही अंदाजा हो जाता है कि कितना खर्च हो चुका है और कितना बचा है.

हालांकि उन्होंने ये भी माना कि आज के समय में पूरी तरह कैश पर निर्भर रहना आसान नहीं है. कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब आपको 470 रुपये देने होते हैं, लेकिन जेब में सिर्फ 500 रुपये का नोट होता है और दुकानदार के पास छुट्टे नहीं होते. ऐसे में UPI सबसे आसान ऑप्शन बन जाता है. इसी वजह से उन्होंने दोनों तरीकों के बीच बैलेंस बनाने का फैसला किया. अब वह अपने कुल पैसों का लगभग 80% नकद रखती हैं, जबकि बाकी 20% UPI में रखती हैं ताकि जरूरत पड़ने पर डिजिटल पेमेंट आसानी से किया जा सके.

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सदफ का कहना है कि कैश साथ रखना और छुट्टे पैसे संभालना कभी-कभी थोड़ा झंझट वाला जरूर लगता है, लेकिन इससे उन्हें अपने खर्चों पर पहले से कहीं ज्यादा नियंत्रण मिला है. यही कारण है कि वह अब फिर से पूरी तरह UPI पर लौटने का इरादा नहीं रखतीं. उनके इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई लोगों ने माना कि नकद भुगतान करने से खर्च का एहसास ज्यादा होता है और इससे फिजूल खर्ची पर रोक लगती है. वहीं कुछ लोगों का कहना था कि आज के दौर में पूरी तरह कैश पर निर्भर रहना मुश्किल है, क्योंकि कई दुकानें और सर्विस डिजिटल पेमेंट को ही प्रायोरिटी देती हैं.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.<p></p> अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. <p></p>फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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