Vitamin D: रोज़ 10 मिनट की धूप से पूरी होगी विटामिन D की कमी? जानिए कितना सन एक्सपोजर है ज़रूरी

Vitamin D Deficiency: शरीर में विटामिन डी का कम होना कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है। ऐसे में इसकी शरीर में पर्याप्त मात्रा होनी जरूरी है।

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विटामिन डी की कमी दूर करने के लिए कितनी धूप लें?

  • Published: 21 Jul 2026, 04:41 PM IST
  • Last Updated: 21 Jul 2026, 04:41 PM IST

Vitamin D Deficiency: विटामिन D शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है, जो हड्डियों को मजबूत रखने, मांसपेशियों के बेहतर कामकाज और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन आज के समय में लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहने, धूप से बचने की आदत और बदलती जीवनशैली के कारण बड़ी संख्या में लोग विटामिन D की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या रोजाना सिर्फ 10 मिनट धूप में बैठना शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए काफी है?

इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। किसी की उम्र, त्वचा का रंग, रहने की जगह, मौसम, धूप का समय और शरीर का कितना हिस्सा धूप के संपर्क में आ रहा है, जैसे कई कारक यह तय करते हैं कि शरीर कितना विटामिन D बना पाएगा। आइए जानते हैं कि 10 मिनट की धूप कब पर्याप्त हो सकती है और किन लोगों को अतिरिक्त सावधानी या डॉक्टर की सलाह की जरूरत पड़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों के लिए रोजाना 10-15 मिनट की धूप पर्याप्त हो सकती है, लेकिन यह हर किसी पर लागू नहीं होता। अगर धूप हल्की है, शरीर का बहुत कम हिस्सा खुला है या व्यक्ति की त्वचा गहरी है, तो विटामिन D बनने में अधिक समय लग सकता है। इसलिए केवल समय नहीं, बल्कि धूप की गुणवत्ता और शरीर का एक्सपोजर भी महत्वपूर्ण होता है।

किस समय की धूप ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है?

आमतौर पर सुबह के बाद और दोपहर से पहले की धूप में UVB किरणें अधिक प्रभावी होती हैं, जो त्वचा में विटामिन D बनने में मदद करती हैं। हालांकि, तेज धूप में लंबे समय तक रहने से सनबर्न का खतरा भी हो सकता है। इसलिए संतुलित समय तक धूप लेना और जरूरत से ज्यादा एक्सपोजर से बचना बेहतर माना जाता है।

किन लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा ज्यादा होता है?

  • जो लोग ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं।
  • बुजुर्ग, जिनकी त्वचा विटामिन D कम बना पाती है।
  • गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में विटामिन D बनने में अधिक समय लग सकता है।
  • पूरी तरह शरीर ढकने वाले कपड़े पहनने वाले लोग।
  • मोटापा, कुछ लीवर या किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोग।

सिर्फ धूप ही नहीं, खानपान भी है जरूरी

अगर शरीर में विटामिन D की कमी है, तो केवल धूप पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। डाइट में अंडे की जर्दी, फैटी फिश (जैसे सैल्मन और सार्डिन), फोर्टिफाइड दूध, दही और कुछ फोर्टिफाइड अनाज शामिल किए जा सकते हैं। कई मामलों में डॉक्टर विटामिन D सप्लीमेंट भी लिख सकते हैं, जिन्हें बिना सलाह के नहीं लेना चाहिए।

कमी का पता कैसे चलता है?

बार-बार थकान महसूस होना, हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और बार-बार बीमार पड़ना विटामिन D की कमी के संभावित संकेत हो सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। सही स्थिति जानने के लिए 25-हाइड्रोक्सी विटामिन डी ब्लड टेस्ट कराया जाता है और उसी के आधार पर डॉक्टर इलाज तय करते हैं।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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लेखक: (कीर्ति)

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