दुर्ग-भिलाई14 घंटे पहले

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जिला अस्पताल दुर्ग में सोमवार को WHO से जुड़ी स्वास्थ्य टीम ने मदर एंड चाइल्ड केयर (MCH) यूनिट का निरीक्षण किया। टीम ने अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी बढ़ाने और जरूरत न होने पर सिजेरियन डिलीवरी से बचने पर जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बैठक की गई। टीम ने डिलीवरी के दौरान महिलाओं को बेहतर और आरामदायक माहौल देने के तरीके बताए। टीम ने अस्पताल में डॉप्लर सुविधा शुरू करने की सलाह भी दी। इससे गर्भवती महिला अपने गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन सुन सकेंगी।

दोपहर करीब 12 बजे WHO की दो सदस्यीय टीम जिला अस्पताल पहुंची। टीम में डॉ. अरुण कुमार सिंह भी शामिल थे। उन्होंने अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड केयर (MCH) यूनिट का निरीक्षण किया।

यूनिट की इंचार्ज डॉ. विनीता धुर्वे ने बताया कि टीम ने MCH और SNCU में उपलब्ध व्यवस्थाओं को देखा। निरीक्षण के बाद अस्पताल के अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ बैठक की गई। बैठक में नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बदलावों पर चर्चा हुई।

सिजेरियन की बढ़ती संख्या पर चिंता

डॉ. विनीता धुर्वे ने बताया कि अभी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी की संख्या बढ़ रही है, जबकि नॉर्मल डिलीवरी के मामले कम हो रहे हैं। इसे देखते हुए WHO की टीम ने लेबर रूम की व्यवस्था और काम करने के तरीके में कुछ बदलाव करने के सुझाव दिए हैं।

टीम ने प्रसव के दौरान महिला को ज्यादा आराम और मानसिक सहारा देने के लिए उसके साथ उसकी पसंद के किसी व्यक्ति को बर्थ कम्पेनियन यानी जन्म सहयोगी के रूप में रखने की सलाह दी है। इससे महिला को अकेलापन महसूस नहीं होगा और प्रसव के समय वह खुद को ज्यादा सुरक्षित और सहज महसूस कर सकेगी।

महिला खुद भी मॉनिटर कर सकेगी बच्चे की धड़कन

WHO की टीम ने अस्पताल के स्टाफ को सलाह दी है कि गर्भवती महिलाओं को भी डॉप्लर से बच्चे की धड़कन जांचने की प्रक्रिया के बारे में बताया जाए। इससे महिला खुद भी बच्चे की धड़कन सुन सकेगी और उसकी जानकारी स्टाफ को दे सकेगी।

डॉप्लर एक छोटा उपकरण है, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे की दिल की धड़कन सुनी जा सकती है और उसकी गति भी जांची जा सकती है। सामान्य तरीके से धड़कन सुनाई देने से पहले भी करीब 12 सप्ताह की गर्भावस्था में डॉप्लर से बच्चे की धड़कन का पता लगाया जा सकता है।

इससे जांच के दौरान मां को अपने बच्चे की धड़कन सुनने का अनुभव मिलता है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मी बच्चे की धड़कन की गति पर नजर रख सकते हैं। इससे गर्भ में बच्चे की स्थिति की शुरुआती निगरानी में मदद मिलती है।

टेबल की जगह बेड पर आरामदायक पोजीशन में डिलीवरी

WHO की टीम ने प्रसव के दौरान महिलाओं को उनकी सुविधा के हिसाब से पोजीशन देने पर जोर दिया। टीम ने कहा कि डिलीवरी के लिए एक ही तय पोजीशन रखने के बजाय महिला जिस स्थिति में खुद को आरामदायक महसूस करे, उसी तरह प्रसव कराया जाना चाहिए। इसके लिए डिलीवरी टेबल की जगह बेड का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया।

महिलाओं की प्राइवेसी को लेकर भी टीम ने कुछ बदलाव करने की सलाह दी। अभी लेबर वार्ड में पर्दों के जरिए प्राइवेसी दी जाती है। टीम ने पर्दों की जगह पार्टिशन लगाने का सुझाव दिया, ताकि हर महिला के लिए अलग जगह बनाई जा सके।

टीम ने बिना जरूरत प्रसव शुरू कराने यानी अनावश्यक इंडक्शन से बचने की सलाह दी। साथ ही प्रसव के दौरान महिलाओं को हल्की एक्सरसाइज और मूवमेंट के लिए बर्थिंग बॉल रखने का सुझाव दिया गया। इससे महिला अपनी सुविधा के अनुसार बैठने, हिलने-डुलने और एक्सरसाइज करने में आसानी होगी।

प्लेसेंटा निकलने के बाद ऑक्सीटोसिन लगाने का सुझाव

प्रसव के बाद ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल को लेकर भी WHO की टीम ने अस्पताल के स्टाफ को जानकारी दी। टीम ने सुझाव दिया कि बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा निकलने के बाद ऑक्सीटोसिन दिया जाए।

इसके अलावा प्रसव के दौरान महिलाओं को रिलैक्स रखने के लिए म्यूजिक चलाने का सुझाव भी दिया गया। टीम के मुताबिक, इससे महिला को रिलैक्स महसूस करने में मदद मिल सकती है और प्रसव के दौरान उसका तनाव कम हो सकता है।

करीब एक घंटे चली बैठक

WHO की टीम के जिला अस्पताल पहुंचने के बाद सबसे पहले सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज के साथ बैठक हुई। करीब एक घंटे चली इस बैठक में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

इसके बाद टीम ने मदर एंड चाइल्ड केयर यूनिट का निरीक्षण किया। टीम ने लेबर वार्ड के स्टाफ से भी सीधे बातचीत की और प्रसव के दौरान महिलाओं को बेहतर सुविधा देने को लेकर जरूरी सुझाव दिए।

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