डिमेंशिया की रोकथाम के लिए WHO के नए दिशानिर्देश

16 जुलाई 2026 स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोचने-समझने और याद रखने की क्षमता में गिरावट तथा डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का जोखिम कम करने के लिए नए वैश्विक दिशानिर्देश जारी किए हैं. संगठन के अनुसार, जीवनभर कुछ जोखिम कारकों में बदलाव करके डिमेंशिया के 45 प्रतिशत तक मामलों को रोका जा सकता है या बीमारी की शुरुआत टाली जा सकती है.

दुनियाभर में 5 करोड़ 70 लाख से अधिक लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं और हर वर्ष इसके लगभग एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं. 

डिमेंशिया एक ऐसा सिंड्रोम है जिससे मरीज़ की याददाश्त बिगड़ने के साथ उसके व्यवहार में बदलाव देखने को मिलते हैं और रोज़मर्रा के काम करने में मुश्किलें पेश आती हैं. डिमेंशिया के क़रीब 60 से 70 प्रतिशत मामले अल्ज़ाइमर रोग से जुड़े होते हैं.

डिमेंशिया मस्तिष्क को गम्भीर रूप से प्रभावित करता है. इसका कोई इलाज नहीं है और इससे होने वाली क्षति को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. 

मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसी दीर्घकालिक बीमारियों को बेहतर ढंग से नियंत्रित करके तथा पर्यावरणीय ख़तरों के सम्पर्क को कम करके इसका जोखिम घटाया जा सकता है.

जोखिमों की बेहतर समझ

WHO के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, “आज हम पहले से कहीं अधिक जानते हैं कि किन कारणों से डिमेंशिया का जोखिम बढ़ता है. ये दिशानिर्देश इस जानकारी को ठोस कार्रवाई में बदलने में मदद करेंगे. अब देशों के पास वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्पष्ट सिफ़ारिशें हैं, जिन्हें वे लोगों के संज्ञानात्मक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तुरन्त लागू कर सकते हैं.”

ये नए दिशानिर्देश, WHO की 2019 की सिफ़ारिशों का नया रूप हैं. इनमें जीवन के हर चरण में संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट को रोकने से जुड़े नवीनतम वैज्ञानिक प्रमाण शामिल किए गए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डिमेंशिया का जोखिम घटाने के लिए चार प्रमुख उपाय सुझाए हैं:

  • नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करना
  • तम्बाकू का सेवन छोड़ना
  • शराब का सेवन कम करना
  • स्वस्थ और सन्तुलित आहार लेना

संगठन ने दिमाग़ी अभ्यास, लोगों से मेलजोल और उच्च रक्तचाप, मधुमेह व बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित रखने को भी महत्वपूर्ण बताया है.

पहली बार, WHO ने डिमेंशिया की रोकथाम के उपायों में वायु प्रदूषण के सम्पर्क को कम करने की सिफ़ारिश भी की है. कुछ लोगों में श्रवण यंत्रों के इस्तेमाल से भी डिमेंशिया का जोखिम घट सकता है.

हालाँकि, WHO का कहना है कि शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी न होने पर केवल डिमेंशिया से बचाव के लिए विटामिन बी या ई, ओमेगा-3 फैटी एसिड या मल्टीविटामिन नहीं लेने चाहिए. संगठन के अनुसार, अभी यह साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि इन पूरकों के लाभ उनके सम्भावित नुक़सान से अधिक हैं.

बढ़ता बोझ

डिमेंशिया केवल याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को ही प्रभावित नहीं करता. इससे व्यक्ति की स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा भी ख़तरे में पड़ सकती है. परिवारों और देखभाल करने वालों पर भी इसका भारी भावनात्मक और आर्थिक बोझ पड़ता है.

WHO के अनुमान के अनुसार, डिमेंशिया के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर वर्ष लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर का नुक़सान होता है. इस लागत का लगभग आधा हिस्सा परिवारों और मित्रों द्वारा बिना भुगतान की जाने वाली देखभाल से जुड़ा है.

संगठन का कहना है कि डिमेंशिया की रोकथाम को ग़ैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाने से इसका वैश्विक बोझ कम किया जा सकता है. इससे अधिक लोग लम्बा, स्वस्थ और स्वतंत्र जीवन जी सकेंगे.

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