राम मंदिर चंदा चोरी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आरएसएस पदाधिकारी व आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र इंजीनियर जगदीश आफले को ट्रस्ट का पहला सचिव नियुक्त किया गया है, जो दैनिक कामकाज संभालेंगे।
जगदीश आफले ( फाइल फोटो )
- Published: 30 Jul 2026, 10:56 AM IST
- Last Updated: 30 Jul 2026, 10:57 AM IST
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी और गबन के आरोपों से उपजे विवाद के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। ट्रस्ट ने अपने दैनिक कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी व मजबूत बनाने के लिए एक नया पद सृजित करते हुए आरएसएस पदाधिकारी और इंजीनियर जगदीश आफले को ट्रस्ट का पहला सचिव नियुक्त किया है।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे की चोरी के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित चार सदस्यीय विशेष जांच दल इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।
कौन हैं जगदीश आफले? जानिए उनका शैक्षणिक और पेशेवर बैकग्राउंड
मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले जगदीश जिन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक (BTech) और उसके बाद एम.टेक (MTech) की डिग्री हासिल की है।
रिटायरमेंट के बाद भारत लौटने से पहले उन्होंने यूरोप और अमेरिका सहित कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में वर्षों तक काम किया है। इसके साथ ही वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों में गिने जाते हैं।
राम मंदिर निर्माण की कोर इंजीनियरिंग टीम में निभा चुके हैं मुख्य भूमिका
जगदीश आफले केवल एक प्रशासनिक अधिकारी या संघ के नेता ही नहीं हैं, बल्कि उनका अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से भी गहरा जुड़ाव रहा है। वे मंदिर निर्माण की उस मुख्य इंजीनियरिंग टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने नींव रखने से लेकर मुख्य सुपरस्ट्रक्चर के निर्माण तक पूरे प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई है।
अब सचिव पद के रूप में एक पदाधिकारी के तौर पर काम करते हुए वे ट्रस्ट के दैनिक कामकाज की निगरानी करेंगे और अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को सीधे रिपोर्ट सौंपेंगे।
चंदा चोरी विवाद, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और एसआईटी (SIT) जांच
गौरतलब है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चंदे में कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद भारी राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की थी।
अदालत के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. की अगुवाई में चार सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस एसआईटी में एक 'फॉरेंसिक ऑडिटर' को भी शामिल किया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया है कि एसआईटी अगले दो सप्ताह के भीतर अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी।
सीईओ पद की भर्ती विवाद के बाद ट्रस्ट ने सृजित किया सचिव का नया पद
इससे पहले ट्रस्ट ने चंदा चोरी विवाद के दौरान मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए एक भर्ती विज्ञापन जारी किया था, जिसकी सैलरी और शर्तों को लेकर काफी विवाद हुआ था।
सीईओ के पद के विपरीत, 'सचिव' का यह नया पद ट्रस्ट द्वारा आंतरिक रूप से सृजित किया गया है। ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से जगदीश आफले के नाम पर मुहर लगाई गई।