Yashvir Singh Biography in Hindi : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की ओर से जैवलिन थ्रो स्पर्धा में उतरने वाले युवा एथलीट यशवीर सिंह देश के उभरते हुए भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल हैं। कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके यशवीर ऐसे परिवार से आते हैं, जहां एथलेटिक्स एक परंपरा की तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। उनके पिता, दादा और चाचा सभी एथलेटिक्स से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि यशवीर के लिए स्पोर्ट्स एक करियर नहीं बल्कि विरासत है।
ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में यशवीर सिंह ने शानदार शुरुआत की है। उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 78.36 मीटर का थ्रो फेंककर शीर्ष-12 में जगह बनाई और फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है। इस स्पर्धा के फाइनल में उनके साथ भारत के दिग्गज खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और रोहित यादव भी पदक की दौड़ में शामिल हैं।
यशवीर सिंह का शुरुआती जीवन
भारतीय जैवलिन थ्रोअर यशवीर सिंह का जन्म 22 अक्टूबर 2001 को हरियाणा के भिवानी जिले के देवसर गांव में हुआ था। यशवीर सिंह के पिता का नाम राय सिंह है, जो खुद नेशनल लेवल के जैवलिन थ्रोअर, रेलवे चैंपियन और रेलवे के रिटायर्ड कोच रहे हैं। उनके दादा और चाचा भी एथलेटिक्स (हर्डल रेस) में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके थे। उनका छोटा भाई उत्सव भी U-18 का जैवलिन थ्रोअर है।
यशवीर सिंह जिस जिले से आते हैं, उसे "मिनी क्यूबा" कहा जाता है और यह बॉक्सिंग के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यशवीर के गांव देवसर से जितेंद्र सिंह और मनीष कौशिक जैसे ओलंपियन मुक्केबाज निकले हैं लेकिन यशवीर के परिवार का रुझान हमेशा एथलेटिक्स की तरफ रहा।
पढ़ाई से खेल की तरफ हुआ झुकाव
दरअसल, शुरुआत में यशवीर सिंह के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा स्पोर्ट्स में कदम रखे। वे चाहते थे कि यशवीर अच्छी पढ़ाई करे। इसके लिए उन्होंने यशवीर को अजमेर के मिलिट्री स्कूल में भेजने की योजना बनाई थी। जब यशवीर लगभग 12 वर्ष के थे, तब मिलिट्री स्कूल प्रवेश परीक्षा की कोचिंग और एक अच्छे निजी स्कूल में दाखिले के लिए उनके पिता ने उन्हें दो साल के लिए दिल्ली भेज दिया।
पिता के आदेश के बाद दिल्ली गये यशवीर का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वे बड़ी मुश्किल से परीक्षाएं पास कर पाते थे। तब उनके पिता को अहसास हुआ कि बेटे को खेलों में उतारना ही बेहतर होगा। इसके बाद वे जयपुर लौट आए, जहां उनके पिता रेलवे में तैनात थे।
यशवीर के भाला फेंक सफर की कैसे हुई शुरुआत?
खेलों में लौटने के बाद यशवीर सिंहने अपनी फिटनेस और फुर्ती को सुधारने के लिए सबसे पहले बास्केटबॉल खेलना शुरू किया। फिर वर्ष 2015 में करीब 14 साल की उम्र में यशवीर ने पहली बार भाला उठाया। शुरुआत में उनके पिता ने उन्हें बांस से बने पारंपरिक भाले से अभ्यास कराया ताकि वे बुनियादी तकनीक और थ्रो की ग्रिप को अच्छे से सीख सकें। जब वे तकनीक में माहिर हो गए, तब उन्हें जैवलिन दी गई।
पिता राय सिंह की माने तो उन्होंने अपने स्पोर्ट्स करियर के दौरान बिना किसी अच्छे कोच या सही सुविधाओं के बहुत संघर्ष किया था इसलिए उन्होंने खुद ही यशवीर को कोचिंग देने का फैसला किया ताकि उनका बेटा उन गलतियों से बच सके, जो उन्होंने की थी।
यशवीर सिंह का संक्षिप्त परिचय
नाम : यशवीर सिंह
जन्म : 22 अक्टूबर 2001
जन्मस्थान : देवसर गांव, भिवानी, हरियाणा
उम्र : 24 वर्ष (2026)
पेशा : भारतीय जैवलिन थ्रो एथलीट
स्पर्धा : पुरुष जैवलिन थ्रो
पिता : राय सिंह (पूर्व राष्ट्रीय जैवलिन थ्रोअर, रेलवे चैंपियन एवं कोच)
भाई : उत्सव सिंह (U-18 जैवलिन थ्रोअर)
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ : 83.72 मीटर (2026)
प्रमुख उपलब्धियां : U-18 नेशनल चैंपियन, नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड तोड़ा, 80 मीटर एलीट क्लब में शामिल, 2025 जी. अर्जुमानोव मेमोरियल मीट में स्वर्ण पदक, 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल के लिए क्वालिफाई।
पहचान : एथलेटिक्स विरासत वाले परिवार से निकलकर पिता की कोचिंग में तैयार हुए भारत के उभरते जैवलिन थ्रोअर, जिन्होंने कम उम्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
जूनियर सर्किट में छाए यशवीर सिंह
सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत के दम पर यशवीर ने जूनियर सर्किट में कमाल कर दिया। उन्होंने 2017 और 2018 के U-18 नेशनल चैंपियनशिप में लगातार गोल्ड मेडल जीते। 2019 जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक हासिल किया, जिसने उनके आने वाले सुनहरे करियर की मजबूत नींव रखी।
2019 की जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद यशवीर सिंह का करियर ग्राफ बेहद तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा। उन्होंने एक के बाद एक कई बड़े रिकॉर्ड तोड़े और देश के शीर्ष भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल हो गए।
नीरज चोपड़ा का तोड़ा रिकॉर्ड
जूनियर लेवल पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद यशवीर ने इंडियन U-20 फेडरेशन कप में हिस्सा लिया। यहाX उन्होंने 78.68 मीटर का थ्रो कर भारत के दमदार एथलीट नीरज चोपड़ा के लंबे समय से चले आ रहे मीट रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इस ऐतिहासिक थ्रो ने उन्हें रातों-रात पूरे देश की नजरों में ला दिया।
80 मीटर से अधिक फेंकने वाले एलीट क्लब में एंट्री
यशवीर सिंह ने अपनी प्रतिभा को जारी रखते हुए सीनियर स्तर पर कदम रखा। इंडियन ग्रैंड प्रिक्स प्रतियोगिता में यशवीर सिंह ने पहली बार 82.13 मीटर का थ्रो फेंककर प्रतिष्ठित 80 मीटर से अधिक फेंकने वाले एलीट क्लब में एंट्री मारी।
किशोर जेना को पछाड़कर जीता गोल्ड
इसके बाद अप्रैल 2025 में चेन्नई में आयोजित इंडियन ओपन एथलेटिक्स मीट में यशवीर ने अपने करियर की बड़ी जीतों में से एक दर्ज की। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 77.49 मीटर का थ्रो किया और एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता किशोर जेना को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने कोच्चि में नेशनल फेडरेशन सीनियर चैंपियनशिप में 80.85 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता था।
दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत दिखाई। इस कड़े मुकाबले में उन्होंने 82.57 मीटर का तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया।
इंटरनेशनल लेवल पर जीता पहला गोल्ड
उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित जी. अर्जुमानोव मेमोरियल मीट 2025 में यशवीर सिंह ने अपनी बादशाहत साबित की। वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर की इस स्पर्धा में उन्होंने 78.32 मीटर का थ्रो फेंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला गोल्ड मेडल जीता।
अपने शानदार प्रदर्शन और वर्ल्ड रैंकिंग के आधार पर वे जापान के टोक्यो में आयोजित 2025 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भारतीय दल में चुने गए। हालांकि, उन्होंने वहां 77.51 मीटर का थ्रो किया लेकिन फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 : फाइनल के लिए क्वालीफाई
यशवीर सिंह ने 28 जून 2026 को 83.72 मीटर का थ्रो फेंककर अपने करियर का नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड स्थापित किया। इसी शानदार फॉर्म के दम पर वे ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 30 जुलाई 2026 को हुए क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने मुश्किल और ठंडे मौसम में 78.36 मीटर का बेहतरीन थ्रो फेंककर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है, जहां वे नीरज चोपड़ा और रोहित यादव के साथ भारत के लिए मेडल जीतने उतरेंगे।
यशवीर सिंह का निजी जीवन
यशवीर सिंह का निजी जीवन बेहद साधारण और अनुशासित है। यशवीर सिंह के पिता हार्ड टास्कमास्टर हैं। वे अपनी ट्रेनिंग में पारंपरिक हरियाणवी अंदाज और सख्त अनुशासन का इस्तेमाल करते हैं। अगर यशवीर से कोई तकनीक समझने में चूक होती है तो पिता उन्हें मैदान पर डांटने से भी पीछे नहीं हटते।
यशवीर का छोटा भाई उत्सव भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चल रहा है और वह U-18 स्तर का जैवलिन थ्रोअर है। दोनों भाई मिलकर अभ्यास करते हैं और एक-दूसरे के खेल में सुधार करने में मदद करते हैं। 24 साल के यशवीर सिंह सोशल मीडिया की चकाचौंध या किसी भी तरह के विवाद से कोसों दूर रहते हैं। यशवीर सिंह फिलहाल अविवाहित हैं।